प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दे दी है। करीब 14 साल बाद लाई गई इस नई नीति का उद्देश्य देश में यूरिया उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।
क्या है NIPU-2026?
यह नीति देश में गैस आधारित ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड यूरिया प्लांट लगाने के लिए निवेश को बढ़ावा देगी। सरकार के मुताबिक, इसके तहत 8 से 9 नए यूरिया प्लांट लगाए जाएंगे, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 1 करोड़ टन (10 मिलियन टन) होगी।
नई नीति की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत में हर साल करीब 4 करोड़ टन (40 मिलियन टन) यूरिया की जरूरत होती है, जबकि देश में करीब 3 करोड़ टन का ही उत्पादन होता है। बाकी यूरिया विदेशों से आयात करना पड़ता है। सरकार का कहना है कि नई नीति से यह अंतर कम होगा और किसानों को समय पर पर्याप्त यूरिया मिल सकेगा।
किसानों और देश को क्या फायदा होगा?
- देश में 8-9 नए यूरिया प्लांट लगेंगे।
- यूरिया का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी।
- किसानों को समय पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आयात पर खर्च कम होगा।
- सरकार के अनुसार, नई नीति के तहत लगने वाले हर प्लांट पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी।
- प्लांट बनने के दौरान 20,000 से 30,000 लोगों को रोजगार मिलेगा, जबकि बाद में करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
नई नीति में क्या बदला है?
सरकार ने 2012 की नीति के मुकाबले निवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया है। इसमें निवेश पर 12% से 16% तक रिटर्न (Return on Equity) का प्रावधान किया गया है। साथ ही विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं।
पहले क्या हुआ था?
सरकार ने 2012 में भी यूरिया क्षेत्र के लिए निवेश नीति लागू की थी। उसके तहत 6 नए यूरिया प्लांट स्थापित किए गए थे, जिनमें 4 सरकारी संयुक्त उपक्रम (JV) और2 निजी कंपनियों द्वारा लगाए गए प्लांट शामिल हैं। हालांकि, यह नीति अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी।
देश में अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल भारत में 33 यूरिया उत्पादन इकाइयां काम कर रही हैं। इसके बावजूद देश अपनी कुल जरूरत का करीब 26-27% यूरिया आयात करता है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यूरिया की मांग 4.5 करोड़ टन (45 मिलियन टन) से अधिक हो सकती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।
सरकार का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि NIPU-2026 के जरिए नए निवेश को बढ़ावा देकर भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इससे किसानों को समय पर यूरिया मिलेगा, आयात पर खर्च कम होगा और देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।




